पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन सिर्फ विचारधारा और राजनीतिक दल का ही नहीं हुआ है, शक्ति केंद्र भी बदलने जा रहा है. बीते 15 साल से नबन्ना की इमारत पावर सेंटर बनी हुई थी, जिसका ममता बनर्जी के सत्ता संभालने से पहले 34 साल तक दबदबा हुआ करता था.

पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद
पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद फिर से परिवर्तन की बयार बह रही है. पहले ममता बनर्जी ने वाम मोर्चा के करीब तीन दशक के शासन के खिलाफ परिवर्तन का नारा दिया था .फिर बीजेपी ने ममता बनर्जी की डेढ़ दशक की सरकार के खिलाफ – चुनाव नतीजे आने के बाद अब बंगाल में परिवर्तन के रुझान आने लगे हैं.
बंगाल में बीजेपी
बंगाल में बीजेपी की शानदार जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय में कहा था, ‘बंगाल में बदला नहीं बदलाव की जीत है’. और बंगाल में धीरे धीरे बदलाव की झलक भी दिखाई देने लगी है.

बंगाल में सचिवालय पर ममता VS बीजेपी
बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य का कहना है, हमने 2021 में ही कहा था कि हमारी पार्टी के सत्ता में आते ही, हम राइटर्स बिल्डिंग से सरकार चलाएंगे ,समिक भट्टाचार्य ने कार्यवाहक मुख्य सचिव दुश्यंत नारियाला से नबन्ना में मुलाकात भी की है. बताते हैं कि मीटिंग में नई सरकार के गठन के बाद सचिवालय को वापस कोलकाता ले जाने पर बातचीत हुई
रायटर्स बिल्डिंग VS नबन्ना
वाम मोर्चा की सरकार (1977-2011) रायटर्स बिल्डिंग से ही संचालित होती थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु और बुद्धदेब भट्टाचार्य रायटर्स बिल्डिंग से ही सरकार चलाते थे. 34 साल की उस अवधि में रायटर्स बिल्डिंग को सिर्फ सचिवालय नहीं, बल्कि लेफ्ट का पावर सेंटर भी माना जाता था. बातचीत में अक्सर मिसाल दी जाती थी, ‘अगर बंगाल की राजनीति समझनी हो, तो रायटर्स के गलियारों की हवा समझनी चाहिए’.