
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल की सत्ता परिवर्तन होते ही पूरी सियासत ही बदल गई है। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की राजनीति फिर से सड़क पर खड़ी है. और वो सड़क के जरिए अपनी सियासत को बचाए रखने की राह पर चल पड़ी हैं. क्योंकि उनके सामने टीएमसी को बचाए रखने के साथ-साथ अपने सियासी आधार को बचाए रखने की चुनौती है,
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘दीदी’ के नाम से मशहूर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी
‘दीदी’ के नाम से मशहूर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की सियासत की शुरुआत ही सड़क से हुई थी.सिंगूर और नंदीग्राम के आंदोलनों के जरिए सड़क पर उतरकर उन्होंने 34 साल के वामपंथी किले को ढहाया था. लेकिन डेढ़ दशक तक सत्ता में रहने के बाद ममता बनर्जी की सियासत एक बार फिर ‘सड़क’ पर आ गई है.

टीएमसी को टूट से बचाने की टेंशन
ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी टेंशन टीएमसी को बचाए रखने की है, क्योंकि सत्ता से बाहर होते ही टीएमसी के नेता बेचैन हैं. ममता बनर्जी ने पार्टी की बैठक रखी थी, जिसमें टीएमसी के 80 में से 60 विधायक पहुंचे ही नहीं. ममता बनर्जी ने सोमवार को दो टीएमसी विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. ममता ने बीजेपी पर टीएमसी को तोड़ने का आरोप भी लगाया. ममता बनर्जी ने कहा कि पैसे और पुलिस से टीएमसी को तोड़ा नहीं जा सकता. कुछ सांसदों-विधायकों को पैसे देकर ज़्यादा फायदा नहीं होगा. टीएमसी और मज़बूत होकर उभरेगी।
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